हाथों की लकीरें ….

माना के तेरे हाथों की लकीरों में मेरा नाम तो नहीं ,

तुने मुझे याद न किया हो,ऐसी भी तो कोई शाम नहीं.

 

 

रविश ‘रवि’

 

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