ज़िन्दगी के कैनवास पर…

ज़िन्दगी के कैनवास पर,

आते, अपलक दृश्य…

हँसते-हंसाते,

रोते-रुलाते,

गाते-गुनगुनाते,

दिखाते हैं वो मंज़र,

जिनसे बन सके,

एक, सम्पूर्ण चित्र…

पर, रह जाती है, अधूरी!

हमारे लिहाज से…

क्योंकि,

नहीं मिलाती,

हमारी सोच,

हमारी ज़िन्दगी की शक्ल से….

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