पंछी दुनिया और साहिल

पंछियों की तरह उड़ना सीखो
नीले गगन को  चूमना सीखो
मत देखो हमें संसार को
कदम बढाकर चलना सीखो

दुनिया का दस्तूर है, बातें करटी रहती है

तू  मत सुन उस दुनिया को , जो रोके तेरे कदम है
चलता राही चलता  जा , थके न ये तेरे कदम
पा  ले अपनी उस मंजिल को , धरती बोले क्या है दम

ढूंढले अपनी हमें छाया को, जिसका कोई पता नहीं
राह मुझे हमें कश्ती जैसा, साहिल वहां पे टिका नहीं
जिस लक्ष्य को तू चाहता है, नाम बड़ा उसका लिख
हरपल देख उस नाम को, तभी सफल होगा तेरा चित्र

मत घबरा उस रात से, रोशनी फिर से पक्ष लेगी
ठहर ना जाए तेरा साहस, इज्ज़त तेरी वो रखेगी
देख ऊंचा उस पर्वत को, छोटी उसकी तुझे दिखेगी
छीलने अपनी उस चोटी को, ताकत तेरी वो ही बनेगी

Leave a Reply