बदलाव की पहल

 

फ़र्क मिट नहीं सकता
दूरियाँ सिमट नहीं सकती ।
फासले कम नहीं हो सकते
कुरीतियाँ ढह नहीं सकती ।
अपनत्व आ नहीं सकता
अहं जा नहीं सकता ।

तब तक

जब तक सामने वाले को
अपने जैसा नहीं समझेंगे ।
जब तक हमें दूसरों की पीड़ा
पर टीस नहीं पहुचेगी ।

तब तक

जब तक हम अपने सूछ्म
स्वार्थ के लिए दूसरे की भावनाओं
से खिलवाड़ बंद  नहीं करते ।
जब तक हम अपने निजी
स्वार्थ से ऊपर नहीं उठते ।

सब कुछ बदल सकता है
अगर हम खुद को बदल के देखें
वरना
कोई इन्कलाब भी
सोये ईमान और मरे हुए ज़मीर को
जगा  नहीं सकता ।

मुश्किल तो हर काम हैं दोस्तों
मगर एक बार खुद को, बदल कर तो देखें।
नजर एक बार अपनी ,बदल कर तो देखें ।
मुश्किल डगर पर,थोडा चल कर तो देखें  ।
खुद अपने से थोडा, पहल करके तो देखें।
आओ इस जहाँ को ,बदल कर तो देखें।

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