सिर्फ खुशियां न मेरे संग में मनाने आए  SALIM RAZA REWA

    oo ग़ज़ल oo
सिर्फ खुशियां न मेरे संग में मनाने आए 
साथ मुश्किल में भी वो मेरा निभाने आए ! 

प्यार के  मारे  हुए कितने  दिवाने आए 
दर्दे  दिल दर्दे  जिगर हमको सुनाने आए !

उनके सीने में अभी भी है वफ़ा की  ख़ुश्बू 
फूल  मैयत में  मेरे छुप के चढ़ाने  आए !

जिनकी यारी पे भरोसा था ख़ुदा से बढ़कर 
आज महफ़िल में वही  ऊँगली उठाने आए !

काम जिनको है सदा तीरों से तलवारों से 
अम्न की बातें वही  मुझको  सीखने आए !

पाप धूल जाते हैं लोगों के यहाँ पर आके  
सोच के दिल में यही  गंगा नहाने  आए !

दिल न तोड़ेंगे कभी मेरा यक़ीं था मुझको 
बन के दुश्मन वो”रज़ा”मुझको सताने आए !

2122 2122 2122 22
gazal by shayar salimraza rewa

      शायर सलीम ”रज़ा ” रीवा

4 Comments

  1. Vijay jamwal from the voice of heart vijay ki klam se 19/12/2015
    • salimraza salimraza 19/12/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir 20/12/2015
  3. salimraza salimraza 07/01/2016

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