चांदनी है या कोई मोतियों की माला है – SALIM RAZA REWA : GAZAL

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चांदनी है या कोई मोतियों की माला है
मेरे घर के आंगन में तुमसे ही उजाला है
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उसकी ही हुक़ुमत है उस का बोल बाला है
जिसके हाथ है कुंजी उसके हाथ ताला है
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उसकी शोख़ नज़रों ने ज़िन्दगी बदल डाली
अब अँधेरे जीवन में हर तरफ उजाला है
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जब भी पाँव बहके हैं गर्दिशो की ठोकर से
उसने ही मुझे अपने बाँहों में संभाला है
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पल में जिंदगी दे दे पल में जिंदगी ले ले
कैसे उसको हम समझें खेल ही निराला है
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मैं तो गिर गया होता रास्ते की ठोकर से
उसकी जुस्तजू ने ही ऐ “रज़ा” संभाला है
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फ़ाइलुन मुफ़ाईलुन फ़ाइलुन मुफ़ाईलुन

21 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/10/2017
  2. SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 15/10/2017
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 15/10/2017
    • SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 15/10/2017
    • SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 17/10/2017
  4. Arun Kant Shukla अरुण कान्त शुक्ला 15/10/2017
    • SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 15/10/2017
  5. sarvajit singh sarvajit singh 15/10/2017
    • SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 15/10/2017
  6. C.M. Sharma C.M. Sharma 15/10/2017
  7. SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 16/10/2017
  8. SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 16/10/2017
    • C.M. Sharma C.M. Sharma 16/10/2017
  9. Madhu tiwari Madhu tiwari 16/10/2017
    • SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 16/10/2017
    • SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 17/10/2017
    • SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 19/10/2017
    • SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 19/10/2017
  10. SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 16/10/2017
  11. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 17/10/2017
  12. SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 17/10/2017

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