बाबुल

मेरे आँशु सुख गई सब !

रो रो के अब
आकाश हि बरसे !
ठुमक ठुमक नाचती थी आगन मे !
दुल्हन बनके
निकली अब घर से !
बेटी तो है बस एक अमानत !
फिर भी बाबुल
रो रो के तरसे !
जननी कि हालत हुइ कुछ ऐसी !
हँस्ती  बाहर
रोती अन्दर से !
हरि पौडेल

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