मेरा बिखरना….

यूँ तो तू भी …
तेरी जुस्तज़ू भी

और

तेरा वज़ूद भी है
पर इन सबके बीच

मेरा होना …

मेरा न होना …

कहीं बिखर गया है …

कहीं खो गया है ….

 

 

रविश ‘रवि’

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