जीने का हुनर

यहाँ मसाईलों के अंधेरे हैं बहुत

चलो वक्त की साख से कुछ पत्ते तोड़ लूँ…

गम्-ए-दौरां ने तराशा है मुझे

ऐ ग़ालिब, तुझसे जीने का हुनर सीख लूँ.

 

रविश ‘रवि’

जीने का हुनर.....

2 Comments

  1. CB Singh 24/01/2013
    • रविश ‘रवि’ raviish 'ravi' 29/01/2013

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