उदयाचल

जब भास्कर आते है खुशियों का दिप जलाते है !

जब भास्कर आते है अन्धकार भगाते है !!

जब सारथी अरुण क्रोध से लाल आता !

तब सारा विश्व खुशियों से नहाता !!

वह लोगो को प्रहरी की भांती जगाये !

लोगो के मन मे खुशियों का दिप जलाये !!

जब सारा विश्व सो रहा होता है !

वह दुनिया को जगा रहा होता है !!

उसके तेज से है सभी घबराते !

उसके आगे कोई टिक नही पाते !!

उसके आने से होता है खुशियों मे संचार !

उसके चले जाने से हो जाता अंधकार !!

उसके चले जाने से दुनिया होती निर्जन !

उसके आ जाने से धन्य होता जन-जन !!

यदी शुर्य नही होता यह शोच के हम घबराते !

बिना शुर्य के प्रकाश के हम रह नही पाते !!

शुर्य के आने से अन्धकार घबराता !

उसके तेज के सामने वह टीक नही पाता !!

इनके आने से होता धन्य-धन्य इन्सान !

सभी उन्हे मानते है भगवान !!

जब हिमालय पर आती उनकी लाली !

उनके आ जाने से हिम भी घबराती !!

इनके आ जाने से जीवन मे होता संचार !

आने से इनके होता प्रकाशमान संसार !!

One Response

  1. rushabh shukla 22/01/2013

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