राशन ओर भाषण

देते हैं सब भाषण – नहीं देता कोई राशन
देना पड़ जाये जो राशन – तो भूल जायेंगे भाषण
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कैसा है यह बच्चा – नहीं लगता यह सच्चा
कैसी है यह पीढ़ी – जो डर-डर चढ़ती सीढ़ी
कैसा यह इंसान – जैसे लगता है हैवान
अरे यह कैसी है टोली – जो खून से खेले होली
कैसा यह कुटुंब – जिसका धुंधला है प्रतिबिम्ब
कैसा यह परिवार – जहाँ पर झगड़ा बारम्बार
कैसा है यह देश – जहाँ पर बदला सबने भेष
कैसा  है जी राज यहाँ पर – कैसा है ये शासन
देते हैं सब भाषण – नहीं देता कोई राशन
देना पड़ जाये जो राशन – तो भूल जायेंगे भाषण
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देखो हिन्दू मुसलमान – आज फिर होगा कत्ले-आम
कैसा भ्रष्टाचार – देखो कैसा आत्याचार
रिशवत नहीं है लेता – कैसा है यह नेता
बाहर से है भोला – पर अन्दर से है भाला
ताश के पत्ते बावन – देखो नेता रुपी रावण
टूटी सच की इमारत – फिर देखो महाभारत
यही है आज का दौर – देखो, देखो मचे न शोर
खींच रहा है केश द्रोपदी के फिर से वही दुशाःसन
देते हैं सब भाषण – नहीं देता कोई राशन
देना पड़ जाये जो राशन – तो भूल जायेंगे भाषण
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यह कैसी है माया – साथ छोड़ती छाया
कैसा है यह प्यार – देखो बार बार तकरार
कैसा है यह नाता – पैसा ही सबका दाता
यह कैसा मेहमान – जो सोता चादर तान
यह कैसा है दंगा – इंसान हो गया नंगा
दुनिया है गजब तमाशा- आशा की जगह निराशा
तो देख मेरे भगवान – तेरा बदल गया इंसान
तु मान या न मान – तेरा कोन करे सम्मान
उल्टा लटका दे सबको – ओर करने दे शीर्षासन
देते हैं सब भाषण – नहीं देता कोई राशन
देना पड़ जाये जो राशन – तो भूल जायेंगे भाषण
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कैसी बेरोजगारी – जनता फिरती मारी मारी
कैसी है यह भूख – देखो सब बैठे हैं मूक
अरे कैसी यह गरीबी – हाय रे बदनसीबी
कैसी यह महंगाई – देखो बाढ़ दर्द की आई
कैसा यह समाज – देखो छोड़ दी सबने लाज
कैसी है यह चोरी , चोरी – उस पर सीनाजोरी
भाई, झूठ का झूठ से मेल – बस यही था आज का खेल
तो करते हैं समाप्त यहीं पर – बदलते हैं हम आसन
देते हैं सब भाषण – नहीं देता कोई राशन
देना पड़ जाये जो राशन – तो भूल जायेंगे भाषण
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गुरचरन मेह्ता

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