खुला आसमाँ

सोचता हूँ उड़ता चलूँ

इस नीले आसमाँ पर

चहचहाते चिडि़यों से पंख लगाकर

नीली छतरी सी ओढ़ कर

व कटी पतंग की डोर बनकर

हाथो मे लिये नीले आसमाँ की ओर

हवा हवाई जैसा हो जाऊँ

ना भरा हो उस पर ईधंन

परियो से मिलू खूब मीठी बाते हो

उस पार नीले गगन पर

अपने-अपने पंख लगाकर ईश्वर भेजता हमको

मोज मनातें और कहते उड़ते रहते खुले आसमाँ पर

सोचता हूँ उड़ता चलूँ

इस नीले आसमाँ पर ।

 

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  1. ganesh dutt ganesh dutt 24/01/2013

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