महफिल में अब होस कहाँ

आओं सुनों बैठ़ो

बैठों सुनो आओ

इस दिल की महफिल में

जो रमा है समा है चांदनी रात में

व पायल की झंनकार लेकर

बलखाती इठलाती हुई आना

हम जवां दिलो की धड़कन को

सभाले हुयें है इस दिल की महफिल में

जो रमा है समा है चांदनी रात में

आओं सुनों बैठ़ो

बैठों सुनो आओ

इस चांदनी रात में

तुम इस महफिल से घबराना नही

हम गुनाह पे गुनाह न करेगें

जिसे तुम गुनाह समझते हो

व महफिल ना सजायेगें इस दिल की महफिल में

जो रमा है समा है चांदनी रात में

आओं सुनों बैठ़ो

बैठों सुनो आओ

इस चांदनी रात में

दिल बहल जाय फूलों पर भॅंवरों की तरह

व सौगात तुम देना इस महफिल में

प्याले नही ये होठों के जाम है

सुला दिया जॅंवा दिलो की महफिल को इस दिल की महफिल मे

जो रमा है समा है चांदनी रात में

आओं सुनों बैठ़ो

बैठों सुनो आओ

इस चांदनी रात में ।

One Response

  1. ganesh dutt ganesh dutt 24/01/2013

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