यह हिन्दुस्तान है जनाब

नमस्कार- सतश्री अकाल- आदाब
यह हिन्दुस्तान है जनाब
यह हिन्दुस्तान है जनाब
यहाँ नेता बिकता है – यहाँ ईमान बिकता है
यहाँ आन बिकती है यहाँ सम्मान बिकता है
यहाँ मंदिर बिकता है यहाँ मस्जिद बिकती है
यहाँ गीता बिकती है यहाँ कुरान बिकता है
यहाँ धरा बिकती है, आसमां बिकता है, अमन बिक जाता है
मुर्दे के जिस्म पर जो कफ़न ओढ़ते हैं वह कफ़न बिक जाता है.
कुछ लोग यहाँ अपने-अपने घरों में रोज दीवाली मनाते हैं
और रोशनी के लिए पड़ोसी का घर जलाते हैं
और तो और यहाँ भरे बाज़ार में
द्रोपदी के वस्त्र उतारे जाते हैं
इतिहास गवाह है
सदियों से जानवर इंसान को कमा-कमा कर खिलाता आया है
पर यहाँ इंसान ने जानवर को मारा ही नहीं
बल्कि उसका चारा तक खाया है
यहाँ कुर्सी तो मिलती ही है – यहाँ मेज भी मिल सकती है
गर खरीदने के इछुक्क हों तो जनाब
तो दुल्हन की सेज भी मिल सकती है
जो लोग हिन्दुस्तान में नहीं रहते वे चाहें तो यहाँ आ सकते हैं
लाखों की तरह लाखों का धन खा सकते हैं
गरीबों की तरह झक्क खा सकते हैं
अमीरों की तरह गरीबों का हक खा सकते हैं
गर खाने को फिर भी कुछ ना मिले
तो झूठे वादे,  झूठी कसम खा सकते हैं
यहाँ पैसों की खातिर आज का लक्ष्मण
राम से नाता तोड़ देता है
और कुर्सी के चक्कर में आकर राम खुद ही
सीता को रावण के पास छोड़ देता है
यह हिन्दुस्तान है जनाब
आज का नोजवान, पटेल को लाठी मारता है
भगत सिंह को फांसी लटकाता है
चंद्रशेखर की मुखबरी करता है
बापू को गोली मरवाता है
और भरे बाज़ार में गांधी की मूर्ति पर
जब कोई पक्षी बीट कर जाता है
तो वह उसे साफ़ नहीं करता
बल्कि अपने बाप का मजाख उड़ाता है
आज गौतम बुद्ध की धरती का रोम -रोम रोने लगा है
और इंसान का ज़मीर जाने कहाँ सोने लगा है
बुद्ध की भूमि, गांधी जी का सपना,
और अम्बेडकर का संविधान
एक बार फिर मिलकर करनी है शुरुआत
नमस्कार- सतश्री अकाल- आदाब
यह हिन्दुस्तान है जनाब
यह हिन्दुस्तान है जनाब
________________________________
गुरचरन मेह्ता 

Leave a Reply