माँ मेरी , ना तू फ़िक्र करना

माँ मेरी, ना तू फ़िक्र करना
बेटे
करने रक्षा आँचल की तेरे, है सीमा पर खड़े|

सुभद्रा की कलम से,हमने सुनी कहानी है
करते रक्षा आँचल की
तेरे लालों ने दी कुर्बानी है |

आंतक का बादल है पसरा
पर माँ मेरी, ना तू कर फ़िक्र
शीश कटा हेमराज का
करते रक्षा तेरी
शांति , मर्यादा की छोड़ फ़कीरी
अब हमें भी आगाज़ है करना|

माँ मेरी , ना तू फ़िक्र करना …………….

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