मदिरा

 

मन मस्त करके 

छोड दु 

कहिँ व्यस्त करके 

छोड दु 

सुख मे भी चाहो 

मुझे 

दुख मे भी चाहो 

मुझे 

मै मदिरा हु 

श्रम कर मजदुर 

थकित हुए तो 

व्यवसायी कि 

पार्टी चले तो 

मुल्यवान हुँ 

नाइट बार मे 

हुँ सस्ता 

लोकल के आकार मे 

मै मदिरा हु 

उच्च समाज मे 

मेरा हि स्थान है 

मुझे अपनाने मे 

इज्जत व सान है 

हुँ मुल्ला पण्डित के 

कमण्डलु मे जी 

मन्त्रि तन्त्री के स्वागत मे भी 

मै मदिरा हु 

नाच गान के 

सुर ताल मे 

बेइमानी और 

व्यभिचार मे 

हर्स ह्वाइट हो वा 

लोकल मे 

मुझे पावोगे 

सभी रंगमंच मे 

मै मदिरा हु 

 

हरि पौडेल

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