ठिठुरन

ठिठुरन

सफ़ेद धुएँ की चादर में लिपटी

सुबह की लालिमा क्यूँ यूं छिपती

ठण्ड में रंग कोहरे का गहरा हो जाता

तमाम गरम कपड़े पहनने को

दिल मचल जाता

इसके बाबजूद फिर भी

ठंडी हवा नश्तर चुभोती

कंपकपाती सुबह कोहरे की

चादर में लिपटी रही

सूर्यदेव तड़फाते रहे

दर्शन को तरसाते रहे

रेलगाड़ियों का रद्ध होना

आम सिलसिला हो गया

मौसम विभाग चेतावनी दे रहा

कोहरा व पाला पड़ने की

हाथ उसके कोई जादू की छड़ी नहीं

कहे खुलजा कोहरा न पड़े पाला

आशंका थी उनकी जाहिर करदी

ठिठुरती भरी ठण्ड से

हर जन को सामना करना पड़ा

वाहन भी अपनी आँखें खोल

बत्ती जला रेंग रेंग कर चलना पड़ा

कुछ बूढ़ों के खून जम गए

प्राण उनके पखेरू हो गए

मौसम विभाग ने फिर चेताया

गलन व पाले से ठण्ड बड़ेगी

उत्तर भारत में न कोई बचेगा

मौसम की धारा कुछ दिन और चलेगी

गर्माहट धीरे धीरे बनेगी

अनुज

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