जिन दरख्तों की गहरी जड़े हैं

जिन दरख्तों की गहरी जड़े हैं

वे आँधियों में तनके खड़े हैं

के बारां से मुझको डरा मत
तेरे घर भी कच्चे घड़े हैं
सच इन्सां से लगने लगे हैं
जो  भी मेरे हत्थे चढ़े हैं
वारिस तो मीरा के नहीं पर
कुछ छींटे हम पे भी पड़े हैं
कैसे हो सकता है मित्र तू
तेरे हर जुमले में छोटे बड़े हैं
चैना खो जावे है इश्क मा
जब नैना से नैना लड़े हैं

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