सुन ले पाकिस्तान

लेकर काफिला चला था
वतन की शान में तू लड़ने
अब अकेला ही चला है
जाँ लुटाके अपनी
दुश्मनों ने धोखे से शीश तेरा हर लिया
खबर नही है उसे कि
उसने क्या गुनाह ये कर दिया
लहू रंग लाएगा नजर सभी को आएगा
कान खोलकर सुनले पाकिस्तान
शेर के मुँह मे डालकर हाथ
क्या तू बच पाएगा
हस्ती मिटा देंगे हम तेरी
तू अल्लाह-अल्लाह चिल्लाऐगा
रूह काँपेगी तेरी
खुदा भी तुझे ठुकराऐगा

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