डन लड़कियों को जिनने जाना,महसूसा कभी न कभी ऐसी ही नजर

सच बताना बुद्ध-
प्यार यूं ही आता है,
जैसी आती है सर्दी,
जैसे उतरती है गर्मी
जैसे पकते हैं धान।
सच -सच बताना बुद्ध-
प्यार यूं ही जाता है छोड़,
जैसे गए थे तुम आधी रात,
जैसे उतार फेंकते हैं रजाई।
सच -सच बताना यशोधरा-
प्यार क्या यूं ही,
रात बिरात उठ कर चला जाता है हमारी जिंदगी से,
यूं ही मायूस,
बिलगा कर जाता है कोई।
उर्मिला सच-सच बताना-
चैदह बरस दूर रहना ही प्यार है
या संग संग डोलना,
कैसा लगा उर्मिला उन सालों में।
पिताजी सच-सच बताना-
प्यार क्या बंधन है,
जकड़न,
जैसे जोंक चिपट जाए तो छोटे नहीं,
जैसे एक हूक जो हमेशा हिच हिचक करता रहे,
जैसे आपने निभाया ताउम्र।
बुद्ध, यशोधरा, उर्मिला और पिता भी रहे खामोश-
जवाब एक पत्ती ने दिया,
प्रेम न बंधन है,
प्रीत न उड़ान,
खुले वितान में,
प्यार है एहसास,
हर पल,
हर क्षीण,
कहता,सुनता,
जैसे सांसें कहतीं,
जब भी जहां भी रहो,
मत भूलो,
कोई है,
जैसे धूप,
जैसे हवा
संग संग।

 

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  1. नादिर अहमद नादिर 10/01/2013

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