साधु

साधु 
 
ढूढ़ रहे हो किसे तुम 
साधु 
भटक  रहे हो 
निकल के घर से 
 
जैसे बीच समंदर मे 
प्यासे माझी 
जल जल देखे 
जल को तरसे 
 
मन्दिर मस्जिद 
भटक रहे हो 
काँप रहे हो 
अपने हि डर से 
 
वो तो हैं 
यहि कहिँ भी 
मिलते नही 
कोइ आडम्बर से 
 
देख  है वो 
यहि आस पास 
तेरे दिल और 
मेरे सर पे 
 
जा कर तुं 
मेहनत,मजदुरी 
आयेंगे वो फिर 
तेरे भी दर  पे 
 
हरि पौडेल 

 

2 Comments

  1. abhiraj singh अभिराज 15/01/2013
    • Paudel ‘हरि पौडेल 15/01/2013