तपस्या का ताप

तपस्या का ताप”—–कश्मीर सिह

 

दुख की घड़ी में

कहीं से जब

सुख नजर आने लगा।

ऐसा लगा जैसे मृत्यु के बाद

नया जन्म फिर से आने लगा।

लम्बी घनी काली रात जब

अन्त में और गहरी होने लगी

भोर हो जाने की आशI जगी तब।

आखें लबालब आँसुओं से भर-भर

लगातार बरसने में लगी जब।

लगा कि जी हल्का होगा

शीघ्र ठहाक्कों से

भरा मौसम होगा अब।

कड़ी मेहनत के बाद आत्मा जब

तपस्या के ताप से अण्डे की तरह

लगे उबलने तो।

समझ लेना चाहिए

हे जीवन के पथिक तुम्हारी

सुख शान्ति समृद्धि की

नवीन बेला उघड़ने वाली है अब।

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