तेरी दिदार

तेरी दिदार 

ढली शाम से ही

तेरे शहर का रास्ता ढुढ रहा था
ढुढते ढुढते शहर हो गई अब
जमी मे न मिलि तो
आशामा देख रहा था
पता ही न चला तुम चादनी हो गई कब्
सिसकता हुवा
जिन्दगि जी रहा था
बे खबर हु मै आँशुवे सुख गई कब्
क्यो याद आती है उफ! उस बेबफा कि
एसी बेरहम से
हुई इस्क क्यो तब
न जाने होगी भी तेरी दिदार कभी
हाल ही पुछ डालो किसिसे
इस बिमार कि अब
नासीबो मे मेरी यहि लिख्खा होगा
दीदार होगी उनसे
कब्र मे  रहुंगा जब
मजार मे तुम फूल डालने न आना
तेरी याद मे मेरी
इन्त्काल होगी जब
हरि पौडेल 

 

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