सजाओ हरीतिमा

 1

(अ)

सोंधी महक,

स्वच्छ वातावरण

कहाँ खो गया?

(ब )

धूल, ईंधन,

बारूद से दूषित

जग हो गया !

2

(अ)

प्लास्टिक हँसे,

पेड़ों के  ठूँठ रोएँ

जो हवा चले…!

(ब)

वृक्षों के लहू..

सींचे जब धरती

प्रकृति रोए !

3

(अ)

फल, सब्ज़ी में,

छिड़की दवाइयाँ

कोई क्या खाए ?

(ब)

पेट अपना

विष- भरी बोतल

कैसे बनाएँ ?

4

(अ)

माटी अपनी,

उपजाऊ इतनी

करो सम्मान !

(ब)

गर्भ इसका,

अमृत- परिपूर्ण

सींचो स्नेह से !

5

(अ)

हँसती सृष्टि,

महकती प्रकृति

अब चीत्कारे !

(ब)

ना काटो वन,

घुटने लगीं साँसें

सुलगे घन !

6

(अ)

युद्ध है सर्प,

प्रदूषण है डंक,

कुचलो फन !

(ब)

भुला दुश्मनी,

जलाओ नेह- दीप

बुझा बारूद !

7

 (अ)

धुआँ ही धुआँ,

तनाव के घेरे में

विक्षिप्त मन.!

(ब)

महके माटी,

प्रकृति गोद झूले

ये देखे स्वप्न…!

8

(अ)

जले नक़ाब,

धरा के सौंदर्य का….

बचाओ उसे !

(ब)

लगाओ पौधे,

सजाओ हरीतिमा

सहेजो उसे !

9

(अ)

है तकनीक,

प्रगति की खातिर..

हो उपयोग !

(ब)

मानव तुम,

उन्नति की खातिर

अति न करो !

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