काली कोठरी में कैद

लगता है चाँद मुजरिम है कैद काट रहा है रातों की घुप्प काली कोठरी में

सूरज को सिपाही बनाकर सुरक्षा व्यावस्था का मुस्तैद जिम्मा सौंपा गया है

धरती ने सम्भाला है चाँद की कारगुजारी का पूरा रोजनामचा चाँद का भरपूर

बिम्ब नदियों,तालाबों,बावडियों,कुओं के निर्मल अनहिले जल ने अपनी – अपनी

फाइलों में सदा सदा के लिए दर्ज कर लिया है बादलों ने रिमाण्ड पर रखा है

बेचारे चाँद को बिजली के झटके और कड़कड़ाहट से ड़राया जाता है

उसे सूरज की निगरानी में धरती के पन्नों में बादलों की उमड़ती घुमड़ती ओट में चाँद कैद है

रातों की काली कोठरी में

 

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