झगड़ा चमचे और कुत्ते का

चमचा – कुत्ते शर्म नहीं आती, गलत रास्ते जा रहा है।

नेताजी का जूँठा, हमारा हक तू खा रहा है।

 

कुत्ता – भाई साहब! आप ही तो कह गये थे।

झोले से अलग दो लड्डू रह गये थे।

हम प्रतिशत हिस्सा नहीं, जानते हैं।

रक्षक हैं सो, अधिकार मानते हैं।

 

 

चमचा – खबरदार! तेरी जुबान खींच लूंगा,

जानवर होकर आदमी से लड़ रहा है।

जानता नहीं, साहब का खास आदमी हूँ।

खांमखां मौत के झमेले में पड़ रहा है।

 

कुत्ता – मैं जानवर, बफादार, कर्तव्य निभाता हूँ ।

आप दिया खाते हैं, मैं किये का खाता हूँ।

 

चमचा – मैं दिन भर इधर-उधर, धन्धे जुगाड़ लाता हूँ।

साहब को धन दिलवाता हूँ,तब साथ खाता हूँ।

 

कुत्ता – आप काले धन्धे करवाते हैं, हराम का खाते हैं।

हम मेहनती बफादार सीधे स्वर्ग जाते हैं, तुम जैसे गधे बन, नरक में चले जाते हैं।

 

चमचा – क्या कहा, हम गधे, कुत्ते शर्म नहीं आती।

डर नहीं होता तो, दम तेरी निकल जाती।

 

कुत्ता – तुम चमचे अस्तित्वहीन हो, काले दिलवाले।

हम पाक साफ वफादार, रंग से काले हैं।

तुम अन्दर काले, तुम हराम के ताले हैं हम रक्षा, तुम भिक्षा के लिए पाले हैं।

 

चमचा – नीच, औकात भूला, बोलना नहीं जानता।

लोग जयकार करते, तू बात नहीं मानता।

 

कुत्ता – मरने से डरता नहीं, औकात जानता हूँ।

जयकार वालों को, तुमसे नीच मानता हूँ।

नेताजी आ जाते हैं, दोनों मिल जाते हैं।

 

चमचा – ये अधिक बोलता है, स्वाभिमान गिराता है, सबके सामने कुत्ता मेरी पोल खोलता है।

नेताजी – तुम्हें शर्म नहीं आती, बकवास बन्द करो।

वफादार से लड़ते, चुल्लू पानी में डूब मरो।

 

चमचा – सर! इसे भगा दो, कहीं चला जायेगा।

कुत्ता जो है चाहे जहाँ टुकड़े खायेगा।

नहीं तो फिर मैं कहीं चला जाऊँगा, जब तक रहेगा, खाना नहीं खाऊँगा।

 

नेताजी – अरे तू चला जायेगा, तो लाइन लग जायेगी, ये वफादार चला गया तो आफत आ जायेगी।

तू स्वाभिमान से यहाँ क्या करता है?

स्वार्थी है इसलिए, हाँ में हाँ भरता है।

अपने को देख औकात में नहीं रहता है।

सोच बराबरी इस वफादार से करता है।

 

चमचा – माफ कर दो, अब मैं गलती नहीं करूँगा।

आप की अनुपस्थिति में, हाँ में हाँ भरूंगा।

इतना देखकर भाई, प्रेम ने कशम उठाई।

चमचागीरी नहीं करेंगे, भूखे ही पेट मरेंगे।

3 Comments

  1. Sunil Gupta 'Shwet' 02/01/2013
  2. पं जी एल चौरसिया 18/01/2013

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