ज़िंदगी का सहारा मिले न मिले SALIMRAZA REWA

gazal ग़ज़ल
ज़िंदगी का सहारा मिले ना मिले
साथ मुझको तुम्हारा मिले ना मिले

आज तुमको गले से लगा लू सनम
फिर ये लम्हें दुबारा मिले ना मिले

खूने दिल से लिखा ख़त ए जाने ग़ज़ल
तुमको ख़त ये हमारा मिले ना मिले

नीद में ख़्वाब में दिन में औ रात में
तू मिले कुछ भी यारा मिले ना मिले

हम हैं मुफ़लिस अमीरों कि बस्ती है ये
इसमें कोई हमारा मिले न मिले

क्या बताये हुई क्या है मुझसे ख़ता
सुनके नज़रे दुबारा मिले ना मिले

वो भी होते तो आता मज़ा कुछ रज़ा
फिर सुहाना नज़ारा मिले न मिले

shayar salimraza 9981728122

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