अमर अमिट भारत

न मेरा

न तेरा

यह भारत देश

हम सबका

 

हम यहां

करेंगे ईमानदारी से

मजदूरी किसानी कुली गिरी

नेता गिरी अफसरी

हर तरह के क्षमतानुसार

अपने-अपने धन्धे अपनायेंगे

 

सशक्त समाज का निर्माण

हर पेट को रोटी जिस्म को कपड़ा

रहने को मकान जीने को सम्मान देकर

हर व्याक्ति को विशेष बनायेंगे

 

अपना खून पसीना बहाकर हम

अपने देश का

कण कण चमकायेंगे

जीवन सीमित है तो क्या हुआ

हम जैसे और भी

अभी कई कर्मठ देशभक्त आयेंगे

 

सृष्टि के अन्तिम क्षण-क्षितिज तक

हम अपना भारत देश

अमर-अमिट बनायेंगे

 

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