प्रतिक्रिया

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योग्यता को मिले सम्मान,

देनेवाले का भी बड़े मान;

जिन मे होता सही-सही ज्ञान,

नहीं होंता उनमे कोई अभिमान!

भावों की इस पुष्प वाटिका में,

आप चुने सुगंधी फूल दिल से,

कविता रुपी पुष्पों की सुगंध से,

गुथें पुष्पों को सबको महकाने मे!

विहंगम मे फैला शब्द सागर-

छंद-लय-तान की हैं सरिताएं,

रचनाएं जो सबमे आनंद बिखराएं;

प्रतिभा “कवी ” की देती दर्शाए!

हम पड़े, मन महक सा जाये,

महशुस हो कलियाँ मुस्कुराये;

तभी यह पुष्प -माला लुभाये !

सुगंध से”सजन”सुगंधीत हो जाये|
सजन कुमार मुरारका

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