वह चुटकियों में हल निकाल देता है

वह चुटकियों में हल निकाल देता है
चालाक है, कीचड़ उछाल देता है ।

घुप्प अंधेरा हर तरफ कायम रहे –
आवरण सूरज पे डाल देता है ।

बात जो करता अमन की,चैन की-
उसको वह घर से निकाल देता है ।

अपना दोगलापन छुपाने के लिए-
मौन-व्रत में खुद को ढाल देता है ।

आपसी रिश्ता निभाने को प्रभात –
न्याय को भी मुस्कुराके टाल देता है ।

() रवीन्द्र प्रभात 

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