कैसे कहूँ अलबिदा

कैसे कहूँ अलबिदा

यह फूल जो मैने बोया है
इश्वर कि एक तोहफा है
आज इस फूल को आप की नजर मे
चड़ाने जारहा हुँ
मुझे जो मिला है
उसी ने दिया है
अब मै इसको आप के घर मे
सजाने जारहा हुँ
यह दुनियाँ की माया है
अब ये आप का तोहफा है
खुद हसुं वा रोउं
न कुछ बोल पारहा हुँ
ये कैसी दुनियाँ की रीत है
अरे ये कैसी तुम्हारी प्रित है
अभि ही अलबिदा कैसे कहूँ
धड़कता है दिल न कुछ सोच पा रहा हुँ

हरि पौडेल

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