याद- परिंदे

डॉ०भावना कुँअर
 

कहाँ से आए

ये उड़ते-उड़ाते

याद परिंदे

हम कैसे बताएँ ।

भीगी पलकें

उदासियों का चोला

पहने बैठीं

चुपके से आकर

देखो तो जरा

हवाओं के ये झोंके

आँखों से कैसे

यूँ मोती चुराकर

आसमान सजाएँ ।

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One Response

  1. Gurpreet Singh 19/12/2015

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