ये खामोशियाँ

डॉ०भावना कुँअर

ये खामोशियाँ

डुबो गई मुझको

दर्द से भरी

गहन औ’ अँधेरी

कोठरियों में।

गूँजती ही रहती

मेरी साँसों में

प्यार-रंग में रंगी

खुशबू भरी

जानी पहचानी-सी

बावरी धुन।

छलिया बन आए

चुरा ले जाए

मेरे लबों की हँसी

दे जाए मुझे

आँसुओं की सौगात

कैसा अजीब प्यार !

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