जीवन इक सपना है -माहिया 1-16

 डॉ हरदीप कौर सन्धु

 1.

भावों का मेला है

इस जग- जंगल में

मन निपट अकेला है ।

2.

ख़त माँ का आया है

मुझको पंख लगे

दिल भी हरषाया है ।

3.

यह खेल अनोखा है

जग में हम आए

बस खाया धोखा हैं  ।

4.

ये गीत  पुराना है

रूठ गया माही

तो आज मनाना है ।

5.

तू जब से  रूठ गया

मुस्काना भूली

दिल मेरा टूट गया  ।

6

गुड़िया देख पटोले

छलकी ये आँखें

मेरा बचपन बोले ।

7 .

चलता कौन बहाना

मौत चली आई

बस साथ तुम्हें जाना ।

8.

गाँव कहाँ वो मेरा

मुर्ग़ा जब बोले

होता रोज सवेरा

9

शब्दों का  गीत बना

अँखिया राह तकें

तू दिल का मीत बना ।

10

अनजाने  भूल हुई

जो दी ठेस तुम्हें

मुझको वह शूल हुई ।

11

दिल जब-जब रोता है

आवाज़ न आती

दर्द बहुत होता है  ।

12

आँखों में पानी है

बिन कुछ भी बोले

कह रही कहानी हैं  ।

13

बादल से जल बरसे

तन तो भीग गया

प्यासा ये मन तरसे  ।

14

जिन्दगी अधूरी है

 दो पल जीवन में

हँसना भी जरूरी है  ।

15

 जीवन इक सपना है

आँख खुली ,देखा

कौन यहाँ अपना है ।

16

घर जो  यह तेरा है

नाज़ुक शीशे का 

इक रैन बसेरा है  ।

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