माहिया 13-24

13

आँसू सब पी लेंगे

जो दु:ख तेरे हैं

उनको ले जी लेंगे

14

मन की तुम मूरत हो

जितने रूप मिले

उनकी तुम सूरत हो

 

 

15

बदले हर मौसम से

ठेस नहीं पाई

जितनी तेरे गम से ।

16

बैरी तो दूर रहे

अपनों से पाए

जितने नासूर रहे ।

17

अपना किसको कहना

मज़बूरी में ही

दिन -रात पड़े रहना

18

बादल ये बरसेंगे ।

मन में धीर धरो

जीवन-पल हरसेंगे ।

19

तुझ-सा न मिला कोई

जिसको याद करें

अँखियाँ हर पल रोईं ।

20

अँधियारे  आएँगे

हम तेरे पथ में

सूरज बन जाएँगे ।

21

पग-पग पर शूल बिछे ।

रुकना कब सीखा !

मंज़िल पर  फूल बिछे ।

 

 

22

जीवन भर ढोई है

पीड़ा की गठरी

फिर भी ना रोई है ।

23

हर नारी की गाथा

आँखों में दरिया

तपता- जलता माथा ।

24

सारा प्यार लुटाया

बदले में दामन

ये पीर-भरा पाया ।

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