माहिया1-12

-रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

1.

ये भोर सुहानी है

चिड़ियाँ मन्त्र पढ़ें

सूरज सैलानी है

2.

आँसू जब बहते हैं

कितना दर्द भरा

सब कुछ वे कहते हैं

3.

मन-आँगन सूना है

वो परदेस गए

मेरा दुःख दूना है

4.

मिलने का जतन नहीं

बैठे चलने को

नयनों में सपन नहीं

5.

यह दर्द नहीं बँटता

सुख जब याद करें

दिल से न कभी हटता

6.

नदिया यह कहती है

दिल के कोने में

पीड़ा ही रहती है

7.

यह बहुत मलाल रहा

बहरों से अपना

क्यों था सब हाल कहा

8.

दिल में तूफ़ान भरे

आँखों में दरिया

हम इनमें डूब मरे

9.

दीपक -सा जलना था

बाती प्रेम -पगी

कब हमको मिलना था

10.

तूफ़ान -घिरी कलियाँ

दावानल लहका

झुलसी सारी गलियाँ

11

मिलने की मज़बूरी

पास बहुत मन के

फिर कैसी है दूरी

12

बेटी धड़कन मन की

दीपक मन्दिर का

खुशबू है आँगन की

-0-

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