शाम

किस कदर खामोश थी मुलाकात की शाम,
हम थे तुम थे और हवाओ पर नन्हे पैग़ाम,
कि तेरी हर मुस्कान पर तारे खिल उठते है,
तेरी आँखो के सहारे दिये जल उठते है,
तेरे आने पर ज़मीन झूम जाती है,
तेरे नूर से जैसे चाँदनी रूप पाती है,
तेरी पलके जब उपर नीचे हो तो,
तो मेरी दिल मे न जाने क्यों उठता है तूफान।

किस कदर खामोश थी मुलाकात की शाम……