हम तो उनके प्यार की शम्मां दिल में जलाए बैठे हैं – SALIMRAZA REWA

–ग़ज़ल —
हम तो उनके प्यार की शम्मां दिल में जलाए बैठे हैं
वो जाने क्यूं हमको अपने दिल से भुलाए बैठे हैं !

मिलने से कतराते हैं क्यूं मुझसे आँख चुराते हैं क्यूं
हम तो उनकी आज भी यादें दिल से लगाए बैठे हैं !

दिल की बात न लब पे आए राज कोई न जाहिर हो
ख़ामोशी में जाने कितना राज़ छुपाए बैठे हैं !

देख के सबके हाँथ में पत्थर खौफ़ नहीं वो खाते हैं
शीशे के घर में भी रह के वो इतराए बैठे हैं !

भूल हुई क्या मुझसे बताते मुझपे फिर इल्ज़ाम लगाते
बिन ग़लती वो अपनों से क्यूं आँख चुराए बैठे हैं !

हाल न पूं छा कोई मेंरा दर्द न कोई जाने है
खुद हैं परेशां हंस हंस के हम सब को हंसाए बैठे हैं !

वो बेगाने हो जाएंगे ऐसी तो उम्मीद न थी !
अब भी उनकी राहों को फूलों से सजाए बैठे हैं

shayar salim raza rewa
9981728122

One Response

  1. Dr. D.S.Shrivastava 21/01/2013

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