खुद की नज़र मे गिरा!!!

खुद की नज़र मे गिरा!!!

मंजिल बदल लेने से रास्ते बदलते नहीं ;
आईने मे तस्वीर मेरी रुहु से नहीं मिलती,
हम जींदे तो खड़े हैं,मगर जान बाकी नहीं ;
नजर के झरोखों से वह तस्वीर नहीं हटती!
अल्लाह जाने!मेरी बेवफाई का राज़ क्या है,
रुकें जहाँ वहीँ खड़े हैं, तेरे प्यार मे बुत बनकर;
मज़बूरी थी मेरी, इल्ज़ाम कबूल,हम बेवफा हैं-
लकीर तकदीर की,गिरफ़्त में थे,पाँव मे जंजीर:
तुम बिन अधूरी ज़िन्दगी, जैसे जल बिन मछली,
सुर बिन बाँसुरी,सुना सा चमन जिसमे खिजाँ नहीं!
मैं हो गया अकेला,मेरी परछाई भी साथ छोड़ चली;
तुम से दूर हुवे, पर दिल से दूर न हो पाये सनम,
ज़िगर रिसता है, दिल बेज़ार है- ग़म के आंसू से,
समझाया दिल को;हमको तो समझे कम से कम,
जीने नहीं देती है मुझे उस लम्हों की कहानियाँ,
तूफान ये यादों का, ववंडर सा मचाता सीने मे;
सीने में शम्मा जलाये,रोशन करनी थी तेरी दुनिया-
जज्वा वही है , रास्ते हो गयें है सिर्फ इधर-उधर;
मुबारक हो, तुम्हे नई राहें, आसन हो तुम्हारा डगर!
साथ चलने का वादा था, अधूरा रह गया मेरा मंज़र;
मुझे गुमराही का नहीं खौफ़,मिले तुम्हे सही हमसफ़र!
मैं बेवफा नहीं,मेरी तकदीर ने मुझे बेवफा कहलाया-!!
आईने मे मेरी तस्वीर खुद को खुद की नज़र मे गिराया|

सजन कुमार मुरारका

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