जनपथ

जनपथ में सजा है दरबार
गुज़रता है बच्चा
बेचता रंगीन अख़बार
“आज की ताज़ा ख़बर –
फलानां दुकान में भारी छूट !
आज की ताज़ा ख़बर –
(मौका मिले तो तू भी लूट)”
 
यह सड़क
सीधी होकर भी
गोल है
पैंसठ साल का सनकी बुढ्ढा
इसपर चलता हुआ
एक दिन अचानक पाता है
इसी सड़क के
बेईमान तारकोल में
धंसा हुआ गरदन तक
सड़क में डूबती
असंख्य अपाहिज अमूर्तियाँ
सड़ांध है विसर्जन तक |
 
वहीं जनपथ के अजायबघर में
सजी है
क्रांति
चहलकदमी
चीख़ें !
दीवारों पर लटकी
यात्ना प्रताड़ना उत्तेजना है
जनपथ के अजायबघर में
लाशों का
फोटू खींचना मना है |
 
जनपथ में दिन भर
आग जलती है
और अंधरात्री में
चलती हैं
प्रणय लीलाएँ |
जनपथ के हर खंभे पर लिक्खा है –
“यहाँ रोशनी न जलाएँ |”
 
सड़क के इस पार जो है
उस पार न होने की उम्मीद
अब कोई नहीं धरता
खंभे के नीचे मूतता
कुत्ता भी
लकड़ी मशाल कोयले में
विश्वास नहीं करता |
 
वहीं दूसरी छोर पर
संसद –
चर्बी का गोदाम
अश्लील और सिद्धांत के बीच
मेज़ें बजाते सभासद
इनकी आत्मा झाग है
भारतवर्ष इनके तोंद में
उठी हुई आग है |
 
पास जनपथ और राजपथ के चौराहे पर
दमकती हैं
विदेशी कम्पनियाँ !
(वर्चुअल बिल्डिंगों में
ईट ढ़ोते भारतीय इंजीनियर)
सच है –
इन्डिया गेट से
जनपथ तक
पराधीन है राजपथ !
 
जनपथ पर विचरने वालों की
हर यात्रा
ख़त्म हो जाती है
ए.सी. कमरे की टीवी में |
हर जिज्ञासा
ख़त्म हो जाती है
इंटरनेट पर एक सर्च कर –
’32,047 रिज़ल्टस रिटरण्ड’ पढ़कर |
जनपथ पर विचरने वालों के
हर विचार ख़त्म हो जाते हैं
जनपथ पर विचरकर |
 
जनपथ सिकुड़ चला है
जैसे निचुड़ रहा है
किसी बंजर गर्भ से भविष्य |
डबल लेन ट्रैफिक के नाम पर
तारकोल में लथपथ
गति और दुर्गति
के बीच टंगा हुआ
पजामा है जनपथ |
 
जनपथ से गुज़रते हुए
अहसास हो बस इतना –
कि तरसे हुए इस सड़क में
जीवन है शेष !
 
जनपथ के शोर शराबों के सन्नाटों में
कितनी अनिवार्य हो जाती है 
दुर्घटना ||
 

 

-Sourav Roy “Bhagirath”

 

 

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