दुधवाला

दुधवाला

वो आए चुपके से सबेरे मुझे जगाने

धिरेसे खटखटाके उन्होने दरवाजा

मुझे जगाया

मै कुनमुनाया निंद मे ही

उन्ही की एहसास मे

धीरे से जो पलडा उघारा मै ने

मै देख्ता रहा कभी उनको

कभी अपनी चौखट को

आज तो एक तारिख है

यह दुधवाला कितना पारिख है

हरि पौडेल

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