सब है अपने

छाया घना कोहरा है,

आँखों के आगे अँधेरा है,

सपनो को तोड़ते मड़ोड़ते,

चलते कई राक्षस …

करो सूरज की चाहत,

देखो रौशनी की आहट,

जोड़ो सबके सपने,

सब है अपने …

सब है अपने …

 

~ योगेश शर्मा ~

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