बेला हेमंत उषा की आई …..!!

बेला हेमंत उषा की आई …..!!

पनिहारिन मुस्काई  …

ओस झरी प्रेम भरी …

रस गागर भर भर लाई ….!!

चहुँ ओर जागृति छाई ….

बेला उषा की आई …!!


सर पर गगरी …

मग चलत …डग भरत….

मुड़त -मुड़त  हेरत   जात …

हिया चुराए …पग डोलत जात ….

वसुंधरा भई नार नवेली ….

 हँसत-मुस्कात ….

राग *भिन्न षडज’ गात  चलत जात  ….

नित प्रात ……रसना ……

प्रेम सागर सों भर-भर गागर …

कैसी नभ से जग  पर छलकाई ….!!


आनन स्मित आभ सरस छाई …….

……प्रेम धुन धूनी रमाई …

…बेला उषा की आई …!!


मोद मुदित जन जन …..

धरा खिली कण कण ….

आस मन जागी …

ओस से भीगी ….

 

श्यामा सी छवि सुंदर ….

श्याम मन भाई …

बेला उषा की आई ….!!!

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भिन्न षडज -हेमंत ऋतु  में गाया जाने वाला राग है ..!!

 

 

One Response

  1. Prem 16/10/2016

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