हल्ला बोल

हल्ला बोल

बंद दरवाजे

देने चाहिए

तुरंत खोल

हो रहा हो गलत

वहां कर देना चाहिए

हल्ला बोल

अंधेरे में दीपक जलाकर

रोशनी सबको दिखाकर

कह देना चाहिए बेफिक्र

उजाले हैं बहुत अनमोल

एक रेखिक नियम में

चलती है दुनिया

धुरी से भटकेगी जब यह

टूटेगी माला धागे से

बिखरेंगें, हम मनकों की तरह

समय रहते ही

जाग कर हमें

देने चाहिए

आंख, कान सबम खोल

बढ़ रही जहां जहां गंदगी

साफ करें तो बात बने

समझ में आता यही सही

इसी में हम सब की बंदगी

छोड़ देना चाहिए अब टालमटोल

आंख मूंदकर चलने

वाले ठोकरें खाते खूब

अपने रास्ते चलने वाले

सच की डगर से मिलने वाले

जान पाते हैं ब्रह्मांड में

गतिमान सब कुछ गोलगोल

कश्मीर सिंह,

 

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