रब की चिता

बारिश की बूँदों जैसे

टप -टप अश्रु
जब पलकों से टपके
मैंने दिल से पूछा
क्या हुआ …??
बीता हुआ कोई पल
है याद आया
दिल धड़का
कुछ बोला न
हमेशा की तरह
चुप के आँचल में
छुपाकर दर्द अपना
बस आँखों से
बहता चला गया
मैं समझ गई
कि आज फिर ….
कोई कोख सूली
चढ़ाई  गई है
किसी कोख में
कब्र बेटी की
फिर बनाई गई है
चिता रब की
आज फिर जलाई गई है !
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