हाइकु मुक्तक

 

उड़ ही गई \ रजनी की चूनर \ सितारों वाली ।

लगी झाँकने \ पूरब के शिखर \ ऊषा की लाली ।।

खिला गगन \ महकता -सा मन \ कलियाँ खिलीं ।

भोर आ गई \ सजाई है बिंदिया \ सूरज वाली ।।

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