दरिया में पानी ना (माहिया)1-11

 

डॉ ज्योत्स्ना शर्मा

1

रुत ये वासंती है

चरणों में हमको

ले लो ये विनती है ।

2

दो बूँद दया बरसे

हम भी हैं तेरे

फिर कौन भला तरसे ।

3

दिल मेरा तोड़ो ना

छलिया ये दुनिया

तनहा मुझे छोडो़ ना ।

4

देरी से आना हो

आकर जाने का

कोई  न बहाना हो  ।

5

सुख- दुख में साथ रहे

सबके शीश सदा

माँ तेरा हाथ रहे ।

6

दरिया में पानी ना

क्यूँ अब रिश्तों में  

वो बात पुरानी ना ।

7

खुशियों का रंग हरा

तुम जो बरस गए

तन धरती का निखरा।

8

खुशियों का रंग भरा  

तेरा साथ मिला 

मन गीतों का निखरा ।

9

होनी तो होती है

कल की क्या चिंता

“रब है” क्यूँ रोती है ।

10

वो ऐसा गाती थी

 फूलों -सी बातें

 खुशबू- सी आती थी ।

 11

कल तीज पडे़ झूले 

सजना ‘वो’ सजना

हम अब तक ना भूले

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