रिश्तों की डोर(हाइकु)

1

 

रिश्तों की डोर

लिपट जाए मन

खुल न पाए

पशु-पक्षी -मानव

सबको ही लुभाए ।

2

भोर में आती

गाती , चहचहाती

प्यारी सहेली

नन्ही  भूरी गौरैया

मन बहला जाती

3

छत पे आती

चपल गिलहरी

पूँछ नचाती

करती कूद-फाँद

माँगती है बादम ।

4

मन का कोना

भीग उठा नेह से

नन्ही ‘मोतिया’

पाँवों में आ बैठी जो

मेरी धोती घेर के ।

 

5

गोद में पड़ी

नन्ही परी नतिनी

देखूँ सपने

उड़ूँ बिना पंख के

नाप लेती आकाश ।

6

चाँद मुखड़ा

गोल आँखें घुमाता

माथे अलक

पूरा कृष्ण कन्हैया

लाडला मेरा भैया ।

7

पावान छाँव

नानी के आँचल की:

फरफराया

‘रहल’ पे बिराजी

रामायण का  पन्ना ।

8

भीगी पलकें

बींध गईं थीं मन

रिश्ता अबोला

अबूझ थी पहेली

अटूट है बन्धन

-0-

 

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