चुने हुए हाइकु-1

चुने हुए हाइकु-1

1

जोगी वे पते

पेड़ों के घर छोड़

निकल पड़े ।

2

जपा कुसुम

खिले , दहके , झरे

तुम न फिरे ।

3

कुनमुनाया

बादल के कन्धे पे

उनींदा चाँद ।

4

वर्षा रानी का

सतरंगी दुपट्टा

नभ अटका ।

5

आकाश बोला

कोई एक बादल

गोद तो भरे ।

6

मिट्टी का घड़ा

बूँद-बूँद रिसता

लो खाली हुआ ।

7

चाँदनी पेड़

सफ़ेद फूलों-भरा

जगमगाए ।

8

हाँफ़ रही है

निढ़ाल दोपहरी

पेड़ों के तले ।

9

भाग्य की बात

दो पैसे की टिकुली

जा चढ़ी माथ ।

10

फूलों से लदा

भूला होशो -हवास

अमलतास ।

11

गाल दहके

किशोरी कनेर के

पाँव बहके ।

( हिन्दी कवयित्रियों की  हाइकु काव्य -साधना -सम्पादक डॉ भगवत शरण अग्रवाल  , प्रकाशन वर्ष: जुलाई 2002  से)

 

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