चुने हुए हाइकु

चुने हुए हाइकु

1

चाँदी की नाव

सोने के डाँड लगे

रेत में धँसी ।

2

नींद खुमारी

सिरहाना न मिला

पत्थर सही ।

3

हमसफ़र

मेरे गुन न गिने

खोट हि देखे ।

4

मैं दूर्वा भली

उजाड़ खण्डहर

कहीं भी पली ।

5

तुम दूध थे

मिली बनके पानी

सदा ही जली ।

6

बन्दिनी मैना

सोने की सलाखों में

रूठे हैं गीत ।

7

फेन , तिनके

माथे धरे सागर

रत्न डुबा दे ।

8

नाज़ुक फूल

सँकरे गुलदान

जान पे बनी ।

9

लिखते पेड़

हरियाले काग़ज़

प्रेम की पाती ।

10

कहीं न कहीं

हम सब बेचारे

दर्द के मारे ।

11

मैं तो खुशबू

हवाओं में समाऊँ

जग महके ।

12

छतों की शाम

वो दालान की धूप

सपना हुई ।

13

काँटों की खेती

जीवन जोत दिया

चुभे तो रोती ?

14

मेघ मुट्ठी में

क़ैद चाँद , फिसला

निकल भागा ।

15

कौन पानी पी

बोलती री चिड़िया

इतना मीठा !

16

पूनो की रात

चाँद ने बहकाया

लहरें उड़ीं ।

17

गुल्लक फोड़

चुलबुली रात ने

बिखेरे सिक्के ।

18

उली चादर

चटक चाँदनी की

बैठे हैं तारे ।

19

धुआँ चिलम

नशाखोर शाम ने

लगाया दम ।

20

फूलों का सही

टूट गई कमर

बोझ उठाते ।

21

काली चादर

उजाले के फूल से

काढ़ती रात ।

22

धूप से डर

पीली छतरी ओढ़े

खड़ा वैशाख ।

23

बेसुध पड़ी

नींद के घोंसले में

पाखी -बिटिया ।

24

यादों की लोई

खूँटी पर टँगे-टँगे

कीड़े कुतरी ।

-0-

( चुलबुली रात ने-हाइकु संग्रह-2006 से चुने हुए हाइकु)

 

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